तीसरी मंजिल की बालकनी से गुटखा थूकते समय 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आए बुजुर्ग, दर्दनाक हादसे में मौत
गंजबासौदा, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा में एक दर्दनाक हादसे में 65 वर्षीय बुजुर्ग की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुजुर्ग अपने मकान की तीसरी मंजिल की बालकनी में खड़े थे। इसी दौरान गुटखा थूकते समय वह पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। इस घटना ने रिहायशी इलाकों में बिजली के तारों की सुरक्षा और मकानों के नजदीक से गुजर रही हाईटेंशन लाइनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतक की पहचान प्रभुलाल गुप्ता के रूप में हुई है। वह मूल रूप से छतरपुर के रहने वाले थे और पेशे से राजमिस्त्री थे। बताया गया है कि वह गंजबासौदा के गायत्री नगर क्षेत्र में किराए के मकान में कई वर्षों से रह रहे थे।
घटना 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे की बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रभुलाल गुप्ता मकान की तीसरी मंजिल की बालकनी में मौजूद थे। इसी दौरान गुटखा थूकते समय वह मकान के पास से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगने से वह गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी मौत हो गई।
प्रारंभिक मीडिया रिपोर्टों में थूक की धार के बिजली के तार के संपर्क में आने की बात कही गई है। हालांकि, बिजली का संपर्क किस सटीक तरीके से बना, इसकी अंतिम पुष्टि जांच और तकनीकी परीक्षण से ही हो सकेगी।
11 हजार वोल्ट की लाइन कितनी खतरनाक होती है?
11 केवी यानी 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन अत्यंत खतरनाक होती है। ऐसी लाइन के संपर्क में आने से गंभीर रूप से झुलसने, हृदय गति रुकने और मृत्यु तक का खतरा रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में हाईटेंशन तार से बिना सीधे छुए भी विद्युत आर्क बन सकता है। नमी और घुले हुए लवण के कारण लार कुछ हद तक विद्युत का संचालन कर सकती है, लेकिन इस घटना में करंट लगने का वास्तविक तरीका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इसलिए हाईटेंशन तारों के पास खड़े होकर कोई वस्तु फेंकना, थूकना या तारों की ओर हाथ बढ़ाना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है। सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
घरों के नजदीक से गुजर रही बिजली लाइन पर सवाल
इस हादसे के बाद क्षेत्र में बिजली की लाइनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि रिहायशी मकानों के बेहद करीब से हाईटेंशन तार गुजर रहे हैं और इन्हें हटाने या सुरक्षित दूरी पर स्थानांतरित करने के लिए पहले भी शिकायतें की गई थीं।
मीडिया रिपोर्टों में मकान मालकिन पदमा चिढ़ार के हवाले से बताया गया है कि उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों से लाइन हटाने का आग्रह किया था। उनके अनुसार, लाइन स्थानांतरित करने का आश्वासन मिला था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि, शिकायतों, विभागीय जवाब और संभावित लापरवाही से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित अधिकारियों को पहले शिकायतें मिली थीं या नहीं और बिजली लाइन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
हादसे के बाद जांच शुरू
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गंजबासौदा पुलिस ने मामले में जांच शुरू किए जाने की जानकारी दी है। हादसे की परिस्थितियों और बिजली लाइन की स्थिति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल इस घटना ने रिहायशी क्षेत्रों में बिजली के तारों की सुरक्षित दूरी, नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।
प्रशासन और बिजली विभाग के सामने अहम सवाल
इस घटना के बाद कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं:
- क्या मकान के पास से गुजर रही 11 केवी लाइन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार स्थापित थी?
- क्या स्थानीय लोगों ने पहले भी लाइन को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं?
- यदि शिकायतें मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई?
- क्या आसपास के अन्य मकानों के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइनों का निरीक्षण कराया जाएगा?
- भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग क्या कदम उठाएगा?
इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट हो सकेंगे।

