छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में कथावाचक युवराज पांडेय को आमंत्रण नहीं मिलने पर उठे सवाल, प्रदेश की प्रतिभाओं की अनदेखी को लेकर चर्चा तेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के गौरव, संस्कृति, परंपरा और कला को समर्पित राज्योत्सव मना रहा है। ऐसे बड़े आयोजन में प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों एवं प्रतिभाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन इसी बीच प्रसिद्ध कथावाचक पंडित युवराज पांडेय को राज्योत्सव कार्यक्रम में आमंत्रण नहीं मिलने का मामला चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि कथावाचक युवराज पांडेय को राज्योत्सव के आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। इस बात को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि प्रदेश के ऐसे कथावाचक, जिन्होंने अपनी कथा शैली, धार्मिक प्रवचनों और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है, उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े उत्सवों में से एक में स्थान क्यों नहीं मिला?
प्रदेश की प्रतिभाओं को मंच देने की बात, फिर स्थानीय कथावाचकों की भागीदारी पर सवाल
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे आयोजनों में स्थानीय कलाकारों, लोकगायकों, साहित्यकारों और धार्मिक-सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को मंच देने की अपेक्षा रहती है।
पंडित युवराज पांडेय जैसे कथावाचक प्रदेश में धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपनी पहचान रखते हैं। ऐसे में उन्हें आमंत्रण नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि राज्योत्सव में प्रतिभाओं के चयन का आधार क्या रखा गया है और किन लोगों को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई है?
क्या प्रदेश की पहचान बनाने वाली प्रतिभाओं को भी मिलना चाहिए सम्मान?
राज्योत्सव का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों के साथ-साथ यहां की कला, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना भी है। ऐसे में यह चर्चा स्वाभाविक है कि प्रदेश के भीतर अपनी पहचान बना चुके लोगों को भी इस तरह के आयोजनों में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
हालांकि, किसी व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किए जाने के पीछे आयोजकों की क्या वजह रही है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में आयोजन समिति और संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
आयोजकों से उठ रहे सवाल
- कथावाचक युवराज पांडेय को राज्योत्सव में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया?
- क्या आमंत्रित किए जाने वाले लोगों की सूची तैयार करते समय प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी गई?
- क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों में छत्तीसगढ़ के कथावाचकों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी पर्याप्त अवसर मिलेगा?
फिलहाल कथावाचक युवराज पांडेय को आमंत्रण नहीं मिलने का यह मामला प्रदेश की प्रतिभाओं को सम्मान और मंच देने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में आयोजन समिति या संबंधित विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।







